अब दुश्मन थर थर कापेंगे, सारंग : 36 किलोमीटर से ही उड़ा देती हे दुश्मन के छक्के

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यहां की खमरिया की फायरिंग रेंज में पहली बार तोप का परीक्षण किया गया। अलग-अलग एंगल से फायरिंग के बाद जांच की गई। अब यह सारंग गन (तोप) सेना को सौंपी जाएगी। सारंग गन की क्षमता 36 किमी से ज्यादा है। परीक्षण में 4 फायर किए गए, जिसमें 15 डिग्री, फिर 0 डिग्री, फिर 15 डिग्री पर फायर हुए। यह तोप धनुष और बोफोर्स से भी ज्यादा घातक है।

सूत्रों की मानें तो इस तोप का निर्माण कानपुर ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में किया गया है। इसको इजराइल की सॉल्टम गन से भी ज्यादा बेहतर बताया जा रहा है। यह नाटो के मापदंडों के अनुरूप है। इसका परीक्षण पिछले 2 सालों से सिक्किम की बेहद ऊंचाई वाले इलाकों के अलावा जैसलमेर के तपते रेगिस्तान में किया गया। इसके बाद मऊ में परीक्षण किया गया था। मंगलवार सुबह जबलपुर में परीक्षण हुआ।

मध्य प्रदेश के जबलपुर की खमरिया रेंज में देश की सबसे बड़ी तोप सारंग का एक और सफल परीक्षण किया गया है. 36 किमी दूर टारगेट को नेस्तोनाबूद कर देने वाली ये तोप अब पूरी तरह से भारतीय सेना में शामिल होने के लिए तैयार है. कानपुर की ऑर्डनेंस फैक्ट्री में बनी ये 155 एमएम की तोप एम-46 तोप का अपग्रेड वर्जन है और दूर खड़े टारगेट के परखच्चे उड़ा सकती है.

इस तोप से मचने वाली तबाही का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसके गोले में 8 किलोग्राम टीएनटी का इस्तेमाल किया जा रहा है. जबकि एम 46 के गोले में सिर्फ 3.4 किलोग्राम टीएनटी का ही इस्तेमाल होता था. टीएनटी का सीधा सिद्धांत होता है- ज्यादा टीएनटी मतलब ज्यादा तबाही.

इस तोप को सारंग नाम भगवान विष्णु के धनुष के नाम से मिला है. यह तोप एक बार में तीन गोले दाग सकती है. सारंग का पुराना वर्जन एम 46 तोप 27 किलोमीटर तक मार कर सकती थी, वहीं इसका अपग्रेड वर्जन 36 किलोमीटर तक मार करने की काबिलियत रखता है. एम 46 की तुलना में इससे होने वाली तबाही भी कहीं ज्यादा होगी.

सूत्रों का कहना है कि इस साल के आखिर तक करीब 30 सारंग तोपें भारतीय सेना में शामिल हो सकती हैं. पहले चरण में 30 और दूसरे चरण में 70 तोपें अगले साल तक भारतीय सेना को सौंपी जाएगी. 2022 तक 300 तोपों को भारतीय सेना में शामिल किया जाना है.

इस सैमी ऑटोमेटिक गन के अंदर गोले डालना भी आसान है. साथ ही इसकी बैरल की लंबाई भी बड़ा कर 7 मीटर की गई है. दुश्मनों के छक्के छुड़ा देने वाली इस घातक तोप का वजन 8.4 टन है और इसकी बैरल को 70 डिग्री तक मूव किया जा सकता है.

मालूम हो कि भारत के पास पहले से के9 वज्र, धनुष और एम-777 होवित्जर तोप मौजूद हैं. ऐसे में सारंग भी भारतीय बेड़े में शामिल हो जाती है तो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के कई इलाके आसानी से भारत की जद में होंगे.

ये है खासियत

155 एमएम और 45 कैलिबर वाली गन की खासियत यह है कि इससे एक मिनट में तीन राउंड फायर किए जा सकते हैं। इसके 130 एमएम से अपग्रेड किया जाएगा। यह तोप बिना रुके एक घंटे तक गोले दगाने की क्षमता रखती है। इसका वजन 8450 किलो है। इसके बैरल की लंबाई 7700 एमएम है। सारंग के जरिए 36 किमी की दूरी पर बैठे दुश्नम को चंद सेकेंड में नेस्तानाबूद किया जा सकता है। यह तोप 70 डिग्री तक घूमकर वार कर सकती है।

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